देश विभाजन के दौरान मानसिक रोगियों पर केन्द्रित टोबा टेक सिंह नाटक के कलाकारों ने झकझोर डाला

रांची। सआदत हसन मंटो द्वारा लिखित प्रसिद्ध “नाटक टोबा टेक सिंह” का निर्देशन भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा रांची जिला सचिव सुमेधा मल्लिक द्वारा किया गया। यह नाटक एक व्यंग्यात्मक लघु कथा है जो भारत के विभाजन के बाद लाहौर के पागलखाने में बंद पागलों की कहानी है, जो एक ऐसे बेतुके विभाजन पर व्यंग्य करती है। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद लाहौर के पागलखाने में बंद पागलों की अदला-बदली पर केंद्रित है। कहानी का मुख्य पात्र बिशन सिंह है, जो टोबा टेक सिंह नामक शहर से है, और वह पागलखाने में बंद है। भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने पागलखाने में बंद पागलों की अदला-बदली करने का फैसला कियाl जिसमें बिशन सिंह को भी भारत भेजा जाना था। बिशन सिंह को जब पता चलता है कि उसका शहर टोबा टेक सिंह अब पाकिस्तान में है, तो वह जाने से इनकार कर देता है और चिल्लाता है कि “टोबा टेक सिंह कहाँ है? भारत में या पाकिस्तान में?” इन मानसिक रुप से बीमार पागलों के दिमाग में किस तरह से कौतूहल मचा हुआ था उसे रंगमंच पर उतरने का जो काम लेखक सआदत हसन मंटो ने किया है वह काबिले तारीफ है। इस नाटक को शहीद ए आजम भगत सिंह, राजगुरु सुखदेव के शहादत दिवस के दौरान बीते रविवार 23 मार्च को ‘शरफरोस” कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें पेंटिंग प्रतियोगिता से शुरुआत हुई थी और 30 मार्च को पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत वितरण किया गया। इसी उपलक्ष्य में बच्चों के नृत्य से कार्यक्रम की शुरुआत की गई,इसके बाद सआदत हसन मंटो का प्रसिद्ध नाटक टोबा टेक सिंह का भी यूनियन क्लब सभागार में किया गया । इस नाटक में इप्टा के कई कलाकारों ने हिस्सा लिया और अपने-अपने किरदार को जीवंत करने में अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। इन कलाकारों ने पात्र को जीने का कोशिश किया। मुख्य रूप से
डॉक्टर की भूमिका में सुमेधा मलिक, फौजी के भूमिका में प्रशांत, वकील बने पीयूष, प्रोफेसर अंजलि, चना वाला सौरभ ,नर्तकी ऐश्वर्या , कवित्री आस्था, चपरासी रोशन , फजल विवान, मुलाकाती एगनेटिश ने निभाया। इस मौके पर भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा झारखंड के पूर्व कार्य अध्यक्ष श्यामल मलिक, प्रदीप तरफदार, विनय भूषण, श्यामल चक्रवर्ती सोंटा, अधिवक्ता कलाम रशिदी, अजय सिंह, प्रवीण कर्मकार, परवेज कुरैशी सहित एकता के कई कलाकार व पदाधिकारीकरण शामिल थे।

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