रामगढ़ l झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय संगठन महामंत्री रवि कुमार महतो ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में 20 करोड़ रुपये के फर्जी निकासी घोटाले ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के दबाव के बाद सरकार ने चार अधिकारियों को सस्पेंड किया है, लेकिन असली गुनहगारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सवाल उठता है कि क्या सरकार घोटालेबाजों को बचाने में लगी है?
विधानसभा में इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ी हुई है। वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने स्वीकार किया कि मामले की जांच सीआईडी कर रही है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई कर रही है। बड़े अधिकारियों और राजनेताओं को बचाने की कोशिश की जा रही है।
राज्य में पहले भी कई घोटाले हुए हैं, लेकिन सरकार की कार्रवाई केवल छोटे अधिकारियों तक ही सीमित रही। रवि महतो का कहना है कि झारखंड में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं और अगर सरकार सच में ईमानदार है, तो बड़े अधिकारियों और नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
सीआईडी की जांच पर उठ रहे सवाल
सीआईडी और पुलिस इस घोटाले की जांच कर रही हैं, लेकिन इससे पहले भी कई मामलों में देखा गया कि जांच सिर्फ दिखावा बनकर रह गई। क्या इस बार भी दोषियों को बचाने की कोशिश होगी? क्या झारखंड सरकार अपराधियों को सजा देने के बजाय उन्हें संरक्षण देने में लगी है?
झारखंड में विकास या लूट-खसोट?
यह मामला सिर्फ 20 करोड़ के गबन का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार के एक बड़े जाल को उजागर करता है। अगर यही हाल रहा, तो झारखंड विकास के बजाय घोटालों और भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह जाएगा। जनता को सरकार से जवाब मांगना चाहिए और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
सरकार की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। देखना होगा कि क्या सच में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।